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                <title>मनोरंजन - Yugantar Pravah </title>
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                <title>Asha Bhosle Biography: संघर्ष, सुर और सिसकियों की कहानी, 16 की उम्र में शादी, बेटी की मौत और 12,000 गानों की विरासत</title>
                                    <description><![CDATA[सुरों की मलिका आशा भोसले का जीवन सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि संघर्ष, दर्द और असाधारण सफलता की कहानी भी है. 92 साल की उम्र में उन्होंने रविवार को कार्डिक अरेस्ट के चलते दुनिया को अलविदा कहा. 12,000 से ज्यादा गाने, दो शादियां, बेटी की आत्महत्या और कई निजी उतार-चढ़ाव उनके जीवन का हिस्सा रहे.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/asha-bhosle-biography-life-story-struggle-family-career-awards/article-8855"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-04/asha-bhosle-biography-in-hindi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Asha Bhosle Biography In Hindi:</strong> भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका <a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/asha-bhosle-cardiac-arrest-hospitalized-breach-candy/article-8854">आशा भोसले </a>का जीवन जितना सुरों से भरा था, उतना ही संघर्षों और दर्द से भी गुजरा. 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली आशा भोसले ने अपने जीवन में वो सब देखा, जिसे सुनकर दिल कांप उठता है. एक तरफ 12,000 से ज्यादा गानों की ऐतिहासिक विरासत, तो दूसरी तरफ निजी जिंदगी के गहरे जख्म, यही उनकी पूरी कहानी है.</p>
<h3><strong>बचपन में उठा पिता का साया, बहन लता के साथ संभाला परिवार</strong></h3>
<p>साल 1933 में महाराष्ट्र के सांगली में जन्मी आशा भोसले महान सिंगर दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं. लेकिन महज 9 साल की उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया. यह वह मोड़ था, जहां बचपन खत्म हुआ और जिम्मेदारियां शुरू हो गईं. बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उन्होंने घर की जिम्मेदारी संभाली. दोनों बहनें गाना गाकर परिवार का पेट भरने लगीं. संघर्ष का यह दौर आसान नहीं था, लेकिन यहीं से आशा भोसले की आवाज ने मजबूती पाई. यही दर्द और जिम्मेदारी आगे चलकर उनकी गायकी में गहराई बनकर उभरी.</p>
<h4><strong>16 साल में घर से भागकर शादी, फिर घरेलू हिंसा का शिकार</strong></h4>
<p>आशा भोसले की निजी जिंदगी का सबसे बड़ा और दर्दनाक अध्याय उनकी पहली शादी रही. महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने सेक्रेटरी गणपतराव भोसले से घर से भागकर शादी कर ली. यह रिश्ता परिवार को मंजूर नहीं था, क्योंकि उम्र में बड़ा अंतर था. शादी के बाद हालात और भी खराब हो गए. ससुराल में उनके साथ मारपीट होती थी और वह घरेलू हिंसा का शिकार रहीं. 11 साल तक यह दर्द सहने के बाद उन्होंने यह रिश्ता खत्म कर दिया. उस समय वह प्रेगनेंट थीं और बच्चों को लेकर मायके लौट आईं. यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन यही उनके आत्मसम्मान की जीत थी.</p>
<h5><strong>टूटन, निराशा और फिर जिंदगी से जंग, बच्चों को अकेले पाला</strong></h5>
<p>पहली शादी टूटने के बाद आशा भोसले पूरी तरह टूट गई थीं. एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्होंने जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया था. लेकिन परिवार ने उन्हें संभाल लिया. धीरे-धीरे उन्होंने खुद को फिर से खड़ा किया और अपने बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उठाई. उनके तीन बच्चे थे- हेमंत, वर्षा और आनंद. उन्होंने मां और पिता दोनों की भूमिका निभाई. यह वह दौर था, जहां एक महिला ने समाज की तमाम मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी और अपने दम पर जिंदगी को नया रास्ता दिया.</p>
<h6><strong>बेटी वर्षा की खुदकुशी और बेटे की मौत, जिंदगी के गहरे घाव</strong></h6>
<p>आशा भोसले की जिंदगी में दर्द का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ. उनकी बेटी वर्षा भोसले, जो पेशे से पत्रकार थीं, डिप्रेशन में चली गईं और साल 2012 में उन्होंने खुदकुशी कर ली. यह घटना आशा भोसले के लिए सबसे बड़ा सदमा थी. वहीं, उनके बड़े बेटे हेमंत भोसले, जो म्यूजिक कंपोजर थे, 2015 में कैंसर से चल बसे. इन दोनों घटनाओं ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया. हालांकि उनका छोटा बेटा आनंद भोसले हमेशा उनके साथ खड़ा रहा और उनके करियर व बिजनेस को संभालता रहा.</p>
<h6><strong>आरडी बर्मन संग दूसरी शादी, प्यार और संगीत का सुनहरा दौर</strong></h6>
<p>पहली शादी के बाद करीब 20 साल तक अकेली रहने के बाद आशा भोसले ने 47 साल की उम्र में दूसरी शादी की. उन्होंने मशहूर संगीतकार आरडी बर्मन से शादी की, जिन्हें पंचम दा के नाम से जाना जाता था. यह रिश्ता भी आसान नहीं था, क्योंकि आरडी बर्मन की मां इस शादी के खिलाफ थीं. लेकिन तमाम विरोधों के बावजूद दोनों ने शादी की. यह उनके जीवन का सबसे खूबसूरत दौर साबित हुआ. दोनों ने साथ में कई यादगार गाने दिए. हालांकि यह साथ ज्यादा लंबा नहीं चला और आरडी बर्मन के निधन के साथ यह कहानी भी खत्म हो गई.</p>
<h6><strong>12,000 गानों की विरासत, अवॉर्ड और अमर पहचान</strong></h6>
<p>आशा भोसले ने अपने करियर में 12,000 से ज्यादा गाने गाकर इतिहास रच दिया. उन्होंने हर जगह में अपनी आवाज का जादू बिखेरा. उनका नाम दो बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ. वह पहली भारतीय सिंगर थीं जिन्हें ग्रैमी अवॉर्ड के लिए नॉमिनेशन मिला. साल 2000 में उन्हें दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. 90 साल की उम्र में भी उन्होंने स्टेज पर लाइव गाकर सभी को हैरान कर दिया था. उनका कहना था कि अब उन्हें ना शोहरत की जरूरत है और ना पैसों की, क्योंकि उन्होंने सब कुछ हासिल कर लिया है.</p>
<h6><strong>सुरों की मलिका अब खामोश, लेकिन कहानी हमेशा जिंदा रहेगी</strong></h6>
<p>आशा भोसले का जीवन सिर्फ सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और भावनाओं का संगम है. एक छोटी बच्ची से लेकर विश्व प्रसिद्ध गायिका बनने तक का उनका सफर हर किसी के लिए प्रेरणा है. उन्होंने दर्द को सुरों में ढाला और दुनिया को संगीत का अनमोल खजाना दिया. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनके गाने और उनकी कहानी हमेशा जिंदा रहेगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 14:13:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Asha Bhosle News: सुरों की मलिका आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट, अस्पताल में भर्ती, PM मोदी ने की स्वस्थ होने की कामना</title>
                                    <description><![CDATA[प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 92 वर्षीय सिंगर की हालत को लेकर देशभर में चिंता है. उनका इलाज इमरजेंसी यूनिट में चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई हस्तियों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/asha-bhosle-cardiac-arrest-hospitalized-breach-candy/article-8854"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-04/asha-bhosle-health-update.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Asha Bhosle News: </strong>भारतीय संगीत की अमर आवाज और सुरों की मलिका आशा भोसले की अचानक बिगड़ी तबीयत ने पूरे देश को झकझोर दिया है. कार्डियक अरेस्ट के चलते 11 अप्रैल को उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इमरजेंसी मेडिकल यूनिट में उनका इलाज जारी है. 92 वर्ष की उम्र में भी सक्रिय रहीं आशा भोसले की हालत को लेकर फैंस, कलाकार और राजनीतिक हस्तियां लगातार चिंता जता रहे हैं.</p>
<h3><strong>कार्डियक अरेस्ट से बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों की निगरानी में इलाज</strong></h3>
<p>जानकारी के मुताबिक, आशा भोसले को 11 अप्रैल को अचानक कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई. तत्काल उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया, जहां इमरजेंसी मेडिकल यूनिट में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया. अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. उम्र के लिहाज से यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जा रही है, फिलहाल अस्पताल की ओर से कोई मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टर हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि उनकी स्थिति स्थिर बनी रहे.</p>
<h4><strong>92 की उम्र में भी सुरों की साधना, बेमिसाल हैं आशा</strong></h4>
<p>आशा भोसले केवल एक गायिका नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की जीवित विरासत हैं. उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए और हर शैली में खुद को साबित किया. 92 साल की उम्र में भी वह सक्रिय नज़र आतीं थीं उन्होंने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी समेत कई भाषाओं में अपनी आवाज दी. उनकी आवाज में जो विविधता और भावनात्मक गहराई है, उसने उन्हें पीढ़ियों का पसंदीदा बना दिया. उनकी तबीयत खराब होने की खबर ने लोगों को झकझोर दिया है.</p>
<h5><strong>फैंस से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक दुआओं का दौर</strong></h5>
<p>जैसे ही आशा भोसले के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर दुआओं की बाढ़ आ गई. फैंस लगातार उनकी सेहत के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नामों ने भी चिंता जताते हुए उनके जल्द ठीक होने की कामना की है. अस्पताल के बाहर भी लोगों की नजरें हर अपडेट पर टिकी हुई हैं. हर कोई बस यही चाहता है कि सुरों की यह अमूल्य आवाज जल्द स्वस्थ होकर फिर से मुस्कुराती नजर आए.</p>
<h6><strong>पीएम नरेंद्र मोदी ने जताया दुःख, की स्वस्थ होने की प्रार्थना</strong></h6>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आशा भोसले की सेहत को लेकर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आशा भोसले जी के अस्पताल में भर्ती होने की खबर से उन्हें दुःख हुआ है. उन्होंने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए प्रार्थना की.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 11:04:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ghuskhor Pandit Vivad: मनोज बाजपेयी की फिल्म के टाइटल पर बवाल, सड़क से कोर्ट तक पहुंचा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[नेटफ्लिक्स पर घोषित मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है. फिल्म के टाइटल को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन, एफआईआर, राजनीतिक बयानबाजी और कोर्ट तक मामला पहुंच चुका है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/ghuskhor-pandit-vivad-manoj-bajpayee-film/article-8674"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2026-02/manoj-bajpai-ghuskhor-pandit.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Ghuskhor Pandit Vivad: </strong>मनोज बाजपेयी की आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ ने रिलीज से पहले ही देशभर में बहस छेड़ दी है. फिल्म के नाम को लेकर ब्राह्मण समाज और हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि मामला अब कोर्ट, NHRC और राजनीति तक पहुंच गया है.</p>
<h3><strong>नेटफ्लिक्स इवेंट से शुरू हुआ विवाद, टाइटल बना बवाल</strong></h3>
<p>03 फरवरी 2026 को नेटफ्लिक्स ने अपने ‘इंडिया प्लान 2026’ का एलान किया, जिसमें कई फिल्मों और वेब सीरीज की घोषणा की गई. इसी कार्यक्रम में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का टीजर भी जारी किया गया. शुरुआत में यह एक सशक्त क्राइम ड्रामा के तौर पर सामने आई, लेकिन जैसे ही टाइटल पर लोगों की नजर पड़ी, विवाद खड़ा हो गया.</p>
<p>आरोप लगे कि फिल्म का नाम एक विशेष जाति और समुदाय को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करता है. सोशल मीडिया पर नाराजगी तेजी से बढ़ी और कुछ ही समय में विरोध प्रदर्शन सड़कों तक पहुंच गया. कई संगठनों ने इसे सुनियोजित तरीके से भावनाएं आहत करने की कोशिश बताया.</p>
<h4><strong>फिल्म की कहानी और किरदार को लेकर मेकर्स की सफाई</strong></h4>
<p>फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं. उनके किरदार का नाम अजय दीक्षित है, जिसे विभाग में ‘पंडित’ कहा जाता है. फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है, जबकि निर्माता नीरज पांडे हैं. विवाद गहराने के बाद मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे ने सोशल मीडिया पर सफाई दी.</p>
<p>उन्होंने कहा कि फिल्म किसी जाति या समुदाय पर आधारित नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति की कमजोरियों और सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार को दिखाती है. नीरज पांडे ने यह भी माना कि टाइटल से दर्शकों के एक वर्ग को दुख पहुंचा है, इसलिए सभी प्रमोशनल मटीरियल फिलहाल हटा दिए गए हैं. नेटफ्लिक्स के सोशल मीडिया अकाउंट से भी टीजर हटा लिया गया है.</p>
<h5><strong>उत्तर प्रदेश में FIR, NHRC का नोटिस और प्रशासन की सख्ती</strong></h5>
<p>फिल्म को लेकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. आरोप है कि फिल्म का टाइटल धार्मिक और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाता है. इसके साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक शिकायत के आधार पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है.</p>
<p>लखनऊ पुलिस कमिशनरेट ने बयान जारी कर कहा है कि किसी भी समुदाय की भावना को आहत करने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानून के दायरे में की जा रही है.</p>
<h6><strong>VHP, संत समाज और संगठनों का तीखा विरोध</strong></h6>
<p>विश्व हिंदू परिषद ने फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ पर कड़ी आपत्ति जताई है. VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इसे हिंदू समाज के सबसे सम्मानित वर्ग पर हमला बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के नाम समाज में नफरत और अशांति फैलाने का काम करते हैं.</p>
<p>वहीं ब्रज क्षेत्र के संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फिल्म पर बैन लगाने की मांग की है. प्रयागराज में परशुराम सेना ने मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बार-बार ब्राह्मण समाज की छवि खराब की जा रही है.</p>
<h6><strong>मध्य प्रदेश में प्रदर्शन, राजनीति और निर्माता संघ की एंट्री</strong></h6>
<p>मध्य प्रदेश के भोपाल सहित कई शहरों में ब्राह्मण समाज ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. एमपी नगर में प्रदर्शनकारियों ने पोस्टरों पर जूते मारकर आक्रोश जताया और फिल्म का नाम बदलने तथा एफआईआर दर्ज करने की मांग की. चेतावनी दी गई कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा.</p>
<p>राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है. बसपा प्रमुख मायावती ने फिल्म के टाइटल को जातिवादी और अपमानजनक बताते हुए बैन की मांग की. उधर फिल्म निर्माता संघ ने भी मेकर्स को नोटिस जारी किया है. संघ का कहना है कि ‘घूसखोर पंडित’ टाइटल के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई, जो नियमों का उल्लंघन है और इस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 18:18:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान पुलिस ने फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और पत्नी श्वेतांबरी को किया गिरफ्तार: 30 करोड़ की कथित धोखाधड़ी में बड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान पुलिस ने 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी केस में फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को मुंबई के यारी रोड स्थित एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया है. मामला उदयपुर के डॉक्टर और इंदिरा IVF के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने 17 नवंबर को FIR दर्ज कराई थी.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/rajasthan-police-arrests-vikram-bhatt-wife-30-crore-fraud-case/article-8545"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-12/film_maker_vikram_bhatt_arrested.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Film Maker Vikram Bhatt Arrested:</strong> 30 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी मामले में राजस्थान पुलिस ने मुंबई पहुंचकर फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को हिरासत में ले लिया है. उदयपुर पुलिस जल्द ही दोनों को ट्रांजिट रिमांड पर उदयपुर लाने की तैयारी कर रही है. यह मामला इंदिरा IVF के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा दर्ज कराई गई FIR से जुड़ा है, जिसमें फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर भारी रकम ठगे जाने का आरोप लगाया गया है.</p>
<h3><strong>डॉ. अजय मुर्डिया की शिकायत से शुरू हुआ 30 करोड़ की धोखाधड़ी का हाई प्रोफाइल मामला</strong></h3>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उदयपुर के मशहूर डॉक्टर और इंदिरा IVF के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी और छह अन्य लोगों के खिलाफ कथित 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था. शिकायत के अनुसार उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया नाम के व्यक्ति से एक इवेंट में हुई, जिसने उनकी दिवंगत पत्नी की बायोपिक फिल्म बनाने का प्रस्ताव दिया.</p>
<p>इसी दौरान उनका परिचय फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्ट से कराया गया. आरोप है कि टीम ने उन्हें 200 करोड़ रुपये के संभावित मुनाफे का भरोसा देकर कई फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री के निर्माण के नाम पर समझौते करवाए और भुगतान लिया. डॉ. मुर्डिया का कहना है कि उन्हें लगातार गलत जानकारियां दी गईं और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के नाम पर भारी भरकम रकम वसूली गई.</p>
<h4><strong>मुंबई से गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड प्रक्रिया हुई तेज</strong></h4>
<p>राजस्थान पुलिस ने विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को मुंबई के यारी रोड स्थित गंगा भवन अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया, जो जानकारी के अनुसार उनकी साली का घर बताया जा रहा है. उदयपुर के एसपी योगेश गोयल ने बताया कि दोनों का मेडिकल मुंबई में ही करवाया गया है और अब बांद्रा कोर्ट में ट्रांजिट रिमांड के लिए आवेदन किया जाएगा.</p>
<p>रिमांड मिलने के बाद दोनों को उदयपुर लाकर आगे की पूछताछ की जाएगी. पुलिस पहले ही इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और बाकी आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.</p>
<h5><strong>डॉ. मुर्डिया को 200 करोड़ रुपये के मुनाफे का भरोसा, फिल्म और डॉक्यूमेंट्री के नाम पर हुए समझौते</strong></h5>
<p>शिकायत में डॉ. मुर्डिया ने दावा किया कि विक्रम भट्ट और टीम ने उन्हें बताया कि श्वेतांबरी और उनकी बेटी कृष्णा भी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हैं और यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा होगा. इसके बाद कई एग्रीमेंट विक्रम भट्ट की कंपनी के साथ किए गए.</p>
<p>आरोप है कि टीम ने रचनात्मक खर्च और प्रोडक्शन कार्यों के नाम पर उनसे करोड़ों रुपये लिए लेकिन प्रोजेक्ट पर कोई वास्तविक प्रगति नहीं की. पुलिस को दिए बयान में डॉ. मुर्डिया ने कहा कि उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में यह फिल्म बनवाने का निर्णय लिया था, लेकिन उन्हें विश्वासघात और धोखाधड़ी का सामना करना पड़ा.</p>
<h6><strong>विक्रम भट्ट ने सभी आरोपों को बताया गुमराह करने वाला</strong></h6>
<p>FIR दर्ज होने के दिन ही विक्रम भट्ट ने मीडिया से बातचीत में डॉ. मुर्डिया के आरोपों को गलत बताया था. उनका कहना था कि यह FIR गुमराह करने वाली है और पुलिस को गलत दिशा में ले जाया गया है. उन्होंने कहा कि शिकायत में लिखी कई बातें तथ्यों से मेल नहीं खातीं और उन्हें विश्वास है कि जांच में सच्चाई सामने आएगी.</p>
<p>हालांकि इसके बाद 29 नवंबर को उदयपुर पुलिस ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी और अन्य आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया था. सभी से 8 दिसंबर तक प्रस्तुत होने को कहा गया था और विदेश जाने पर भी रोक लगा दी गई थी.</p>
<h6><strong>उदयपुर पुलिस की जांच तेज, हाई प्रोफाइल मामले में कई पहलुओं की गहराई से जांच जारी</strong></h6>
<p>उदयपुर के एसपी योगेश गोयल ने बताया कि यह मामला भूपालपुरा थाने में दर्ज किया गया और वरिष्ठ स्तर पर जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगा रही है कि समझौतों के तहत ली गई रकम कहां खर्च हुई और क्या वास्तव में प्रोजेक्ट शुरू भी किया गया था या नहीं.</p>
<p>पुलिस तकनीकी जांच के साथ वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है. टीम आरोपियों के बीच हुए संवाद, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट की भी जांच कर रही है. चूंकि यह मामला बॉलीवुड से जुड़े हाई प्रोफाइल व्यक्तियों का है, इसलिए पुलिस मामले को बेहद संवेदनशीलता और सावधानी से हैंडल कर रही है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>क्राइम</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Dec 2025 23:11:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>Actor Dharmendra Biography: बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र का सफर, परिवार, करियर और विरासत जिन्होंने पूरे देश को मोह लिया</title>
                                    <description><![CDATA[धर्मेंद्र का सोमवार को 89 साल की उम्र में निधन हो गया. छह दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बने. पंजाब के एक गांव से निकलकर मुंबई पहुंचे धर्मेंद्र की जिंदगी संघर्ष, सफलता, परिवार और अद्भुत विरासत की अद्भुत दास्तां है.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/dharmendra-biography-marriage-children-career-life-story/article-8510"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-11/actor_dharmendra_biography_in_hindi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Actor Dharmendra Biography:</strong> बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र का सोमवार को उनके मुंबई निवास में निधन हो गया. सिने जगह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम लोगों ने दुःख व्यक्त किया. धर्मेंद्र का जीवन भारतीय सिनेमा का एक ऐसा अध्याय है जिसे भुलाया नहीं जा सकता. 1960 के दशक में करियर की शुरुआत करने वाले इस कलाकार ने एक्शन, रोमांस, कॉमेडी और ड्रामा जैसी हर विधा में अपनी छाप छोड़ी. वह सिर्फ सुपरस्टार नहीं थे बल्कि इंसानियत से भरा एक बड़ा दिल रखने वाले अभिनेता थे. उनका सफर, परिवार और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.</p>
<h3><strong>पंजाब से बॉलीवुड तक धर्मेंद्र की शुरुआती जिंदगी और संघर्ष</strong></h3>
<p>धर्मेंद्र का जन्म 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नासराली गांव में हुआ. उनका पूरा नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल था. पिता केवल कृष्ण गांव के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे और मां सतवंत कौर गृहिणी थीं. बचपन सानेहवाल गांव में गुजरा जहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई. फिल्मों में आने का सपना उन्होंने बहुत कम उम्र में ही देख लिया था.</p>
<p>पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फिल्मफेयर की न्यू टैलेंट प्रतियोगिता जीती जिसके बाद वह अभिनय का सपना लेकर मुंबई आ पहुंचे. शुरुआती दिनों में संघर्ष इतना था कि कई रातें उन्होंने रेलवे स्टेशन पर बिताईं और कम पैसों में गुजारा किया. प्रोड्यूसर्स तक पहुंचने के लिए वह मीलों पैदल चलते, ताकि पैसे बचाकर खाना खा सकें. यही संघर्ष बाद में उनकी सफलता का मजबूत आधार बना.</p>
<h4><strong>अभिनय की शुरुआत और शुरुआती हिट फिल्में</strong></h4>
<p>धर्मेंद्र ने 1960 में ‘दिल भी मेरा हम भी तेरे’ से बॉलीवुड में कदम रखा. फिल्म ने खास कमाल नहीं किया, लेकिन उनके अभिनय ने दर्शकों का ध्यान खींचा. इसके बाद ‘शोला और शबनम’, ‘अनपढ़’, ‘बंदिनी’, ‘हकीकत’, ‘ममता’, ‘मेरे हमदम मेरे दोस्त’, ‘अनुपमा’, ‘आदमी और इंसान’ और ‘दो रास्ते’ जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया. शुरुआती एक दशक में ही उन्होंने खुद को एक गंभीर और कुशल कलाकार के रूप में साबित कर दिया था. उनका अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस उन्हें धीरे-धीरे सुपरस्टारडम की ओर ले जा रहा था.</p>
<h5><strong>सत्तर का दशक और धर्मेंद्र का सुपरस्टार बनना</strong></h5>
<p>सत्तर का दशक धर्मेंद्र के करियर की ऊंचाइयों का समय था. इसी दशक में उन्होंने सबसे अधिक लोकप्रियता पाई. हेमा मालिनी के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों की पसंद बन गई. ‘सीता और गीता’, ‘तुम हसीन मैं जवान’, ‘राजा जानी’, ‘जुगनु’, ‘दोस्त’, ‘शराफत’, ‘पत्थर और फूल’, ‘चरस’, ‘चाचा भतीजा’ और ‘आजाद’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को चरम पर पहुंचा दिया.</p>
<p>इसी दौर में <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>‘शोले’ </strong></span>जैसी ऐतिहासिक फिल्म आई जिसमें उन्होंने वीरू का किरदार निभाया जो आज भी भारतीय सिनेमा का सबसे यादगार किरदार माना जाता है. ‘मेरा गांव मेरा देश’ जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय को खूब सराहा गया और वह बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स की सूची में शामिल हो गए.</p>
<h6><strong>धर्मेंद्र का पारिवारिक जीवन और उनकी दोनों शादियां</strong></h6>
<p>धर्मेंद्र का निजी जीवन हमेशा चर्चा में रहा. फिल्मों में आने से पहले बहुत कम उम्र में उनकी पहली शादी प्रकाश कौर से हुई थी. इस शादी से उनके चार बच्चे हुए जिनमें दो बेटे सनी देओल और बॉबी देओल तथा दो बेटियां अजीता और विजीता शामिल हैं. सनी और बॉबी दोनों बॉलीवुड के सफल अभिनेता बने, जबकि अजीता और विजीता हमेशा लाइमलाइट से दूर रहीं और अपने निजी जीवन पर केंद्रित रहीं.</p>
<p>बाद में साल 1980 में धर्मेंद्र ने अभिनेत्री हेमा मालिनी से दूसरी शादी की. इस शादी से उनकी दो बेटियां हुईं, एशा देओल और अहाना देओल. एशा ने कुछ वर्षों तक फिल्मों में काम किया जबकि अहाना ने अभिनय की दुनिया में कदम नहीं रखा और अपनी पारिवारिक जिंदगी में व्यस्त रहीं. दोनों शादियों से हुए ये छह बच्चे धर्मेंद्र की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और परिवार आज भी बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में गिना जाता है.</p>
<h6><strong>एक्शन, कॉमेडी और बाद के दशकों का शानदार करियर</strong></h6>
<p>धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा का ही मैन इसलिए कहा गया क्योंकि वह अपने एक्शन दृश्यों को खुद करने पर जोर देते थे. उन्होंने कभी भी बॉडी डबल का सहारा नहीं लिया. एक फिल्म में उन्होंने असली चीते के साथ लड़ाई तक दी जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया. उनके करियर में एक्शन फिल्मों की भरमार थी, लेकिन कॉमेडी में भी उनका अंदाज सबसे अलग रहा. ‘चुपके चुपके’ में उनका मासूम और हास्य से भरा किरदार आज भी लोगों को हंसाता है.</p>
<p>80 और 90 के दशक में उन्होंने कैरेक्टर रोल्स में काम किया और ‘लाइफ इन ए मेट्रो’, ‘अपने’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’ और ‘जॉनी गद्दार’ जैसी फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाईं. 2023 में ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में उनकी वापसी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया. इसके बाद 2024 में वह ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में नजर आए. उनकी फिल्म ‘इक्कीस’ 2025 में रिलीज होने वाली है जिसे संभवत उनकी अंतिम फिल्म माना जा रहा है.</p>
<h6><strong>किस्से, रिश्ते और स्टारडम के पीछे का इंसान धर्मेंद्र</strong></h6>
<p>सुपरस्टार होने के बावजूद धर्मेंद्र का दिल हमेशा विनम्रता से भरा रहा. रेलवे क्लर्क की नौकरी से फिल्मी दुनिया में आए इस कलाकार ने हमेशा अपने संघर्ष को याद रखा. शशि कपूर द्वारा घर बुलाकर खिलाया खाना हो, दिलीप कुमार को बड़े भाई की तरह सम्मान देना हो या गोविंदा की मुश्किल समय में मदद करना, ऐसे कई किस्से उनके मानवीय रूप को उजागर करते हैं. मीना कुमारी के साथ उनकी दोस्ती और शायरी के प्रति रुचि भी अक्सर चर्चाओं में रही. फिल्मों की दुनिया में इतने बड़े स्टार होने के बावजूद परिवार के प्रति उनका जुड़ाव हमेशा गहरा रहा.</p>
<h6><strong>अभिनेता से संसद तक का सफ़र </strong></h6>
<p>फिल्मों में अपार सफलता हासिल करने के बाद धर्मेंद्र ने सार्वजनिक जीवन में कदम रखते हुए राजनीति का रास्ता चुना. भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें 2004 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की बाड़मेर जैसलमेर संसदीय सीट से उम्मीदवार बनाया.</p>
<p>धर्मेंद्र ने यह चुनाव बड़ी जीत से जीता और संसद पहुंचे. हालांकि वह संसदीय गतिविधियों में बहुत सक्रिय नहीं रहे, लेकिन उनके चुनाव जीतने ने यह साबित किया कि उनकी लोकप्रियता केवल सिनेमा तक सीमित नहीं थी, बल्कि जनता के बीच भी उनका सम्मान बेहद ऊंचा था. संसद के अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन की कार्यप्रणाली पर कुछ स्पष्ट और विवादित बयान भी दिए, जो उस समय सुर्खियों का विषय बने. राजनीति में उनका सफर लंबा नहीं रहा, लेकिन यह उनकी बहुआयामी व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण झलक थी.</p>
<h6><strong>अवॉर्ड्स, उपलब्धियां और अमर विरासत</strong></h6>
<p>धर्मेंद्र के योगदान को लेकर कई बड़े सम्मान उन्हें मिले. साल 2012 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया. उनकी प्रोड्यूस की हुई फिल्म ‘घायल’ को 1990 में नेशनल अवॉर्ड मिला और 1991 में इसे बेस्ट फिल्म का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिया गया.</p>
<p>1997 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला. छह दशक तक चले करियर में उन्होंने करीब 300 फिल्मों में काम किया. उनका जादू, उनकी सादगी और उनका अभिनय हमेशा भारत के लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Nov 2025 17:33:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>अब अपनी भाषा में देखें दुनिया का मनोरंजन! Google Play और App Store पर लॉन्च हुआ ‘Rochak’ मोबाइल ऐप</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में लॉन्च हुआ ‘Rochak’ मोबाइल ऐप, जो AI-डबिंग तकनीक से फ़िल्में और वेब सीरीज़ दर्शकों की मातृभाषा में उपलब्ध कराता है। सुरक्षित पेमेंट, आसान सब्सक्रिप्शन और यूज़र-फ्रेंडली डिज़ाइन के साथ यह ऐप भारतीय OTT अनुभव को नई दिशा देने वाला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/now-see-the-entertainment-of-the-world-in-your-language/article-8352"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-09/rochak_app.jpg" alt=""></a><br /><p>मनोरंजन प्रेमियों के लिए बड़ी खुशख़बरी! अब विदेशी फ़िल्में और वेब सीरीज़ समझने के लिए भाषा की दिक़्क़त नहीं होगी। ‘<a href="https://rochak.app/">Rochak</a>’ मोबाइल ऐप <a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=app.digirochak.play">Google Play Store</a> और <a href="https://apps.apple.com/us/app/rochak/id6751473907">Apple App Store</a> पर लॉन्च हो चुका है। यह ऐप AI-डबिंग तकनीक की मदद से दुनिया भर का कंटेंट आपकी मातृभाषा में उपलब्ध कराता है। हॉलीवुड से लेकर साउथ इंडियन ब्लॉकबस्टर तक, सबकुछ अब आसानी से देखा जा सकेगा।</p>
<h3><strong>भाषा की दीवार अब नहीं बनेगी रुकावट</strong></h3>
<p>आज के समय में दर्शक दुनियाभर का कंटेंट देखना चाहते हैं, लेकिन भाषा की बाधा अक्सर बीच में आ जाती है। ‘<a href="https://rochak.app/">Rochak</a>’ ऐप इस समस्या का समाधान बनकर सामने आया है। चाहे हॉलीवुड की फ़िल्में हों, यूरोप का ड्रामा हो या दक्षिण भारत का ब्लॉकबस्टर, अब दर्शक इन्हें अपनी पसंदीदा भाषा में देख सकेंगे। इसको आप </p>
<h4><strong>Rochak टीम का विज़न</strong></h4>
<p>Rochak टीम का कहना है कि “मनोरंजन का असली मज़ा तब है जब दर्शक कहानी से भावनात्मक रूप से जुड़ सके। भाषा इसमें बाधा नहीं बननी चाहिए। Rochak के ज़रिए हम यही सुनिश्चित कर रहे हैं।”</p>
<h5><strong>ऐप की ख़ास विशेषताएँ</strong></h5>
<ul>
<li>AI-डबिंग तकनीक से फ़िल्में और वेब सीरीज़ किसी भी भाषा में उपलब्ध</li>
<li>सुरक्षित पेमेंट ऑप्शन – Razorpay और PayPal</li>
<li>आसान और लचीले सब्सक्रिप्शन प्लान्स</li>
<li>यूज़र-फ्रेंडली डिज़ाइन और पर्सनलाइज़्ड प्रोफ़ाइल</li>
<li>पसंदीदा भाषा चुनने का विकल्प और रोज़ नए कंटेंट का आनंद</li>
</ul>
<h6><strong>विशेषज्ञों की राय</strong></h6>
<p>डिजिटल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत जैसे बहुभाषी देश में ‘Rochak’ ऐप OTT इंडस्ट्री के लिए एक नया युग लेकर आया है। यह न केवल मनोरंजन को और अधिक समावेशी बनाएगा, बल्कि भारतीय दर्शकों की सांस्कृतिक विविधता को भी ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगा।</p>
<h6><strong>अभी करें डाउनलोड</strong></h6>
<p>अगर आप भी चाहते हैं फ़िल्में और वेब सीरीज़ अपनी भाषा में देखने का असली मज़ा, तो अब इंतज़ार मत कीजिए।</p>
<p><strong>यह एक sponsored कंटेंट है इसके लिए युगान्तर प्रवाह जिम्मेदार नहीं है</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Sep 2025 15:32:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रिया मराठे का निधन: 38 साल की उम्र में कैंसर से जंग हार गईं जानी-मानी मराठी और हिंदी टीवी अभिनेत्री</title>
                                    <description><![CDATA[मराठी और हिंदी टीवी जगत की लोकप्रिय अभिनेत्री प्रिया मराठे का रविवार सुबह करीब 4 बजे मुंबई के मीरारोड स्थित घर में निधन हो गया. वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रही थीं. 38 साल की उम्र में उनका यूं अचानक जाना कला जगत और प्रशंसकों के लिए गहरा सदमा है. आज शाम 4 बजे मीरारोड श्मशानभूमि में उनका अंतिम संस्कार होगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/priya-marathe-passes-away-marathi-hindi-actress-cancer/article-8314"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-08/actress_priya_marathe_passes_away.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Priya Marathe Passes Away: </strong>टीवी धारावाहिकों और वेब सीरीज से घर-घर में पहचान बनाने वाली मराठी अभिनेत्री प्रिया मराठे अब इस दुनिया में नहीं रहीं. रविवार तड़के 4 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. वह कैंसर से काफी समय से लड़ रही थीं और महज़ 38 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उनके निधन से मराठी और हिंदी टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है.</p>
<h3><strong>छोटे पर्दे से स्टारडम तक का सफर</strong></h3>
<p>प्रिया मराठे ने अपने करियर की शुरुआत मराठी टेलीविजन से की और जल्द ही दर्शकों के बीच खास पहचान बना ली. तू तिथे मी, तुझेच मी गीत गात आहे जैसे धारावाहिकों से वह मराठी दर्शकों की चहेती बन गईं. इसके बाद हिंदी धारावाहिक पवित्र रिश्ता में उनके अभिनय ने उन्हें पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया. उन्होंने कसम से और बड़े अच्छे लगते हैं जैसे धारावाहिकों में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई. टीवी की दुनिया में उनका नाम मेहनती और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिना जाता था.</p>
<h4><strong>कैंसर से लंबी जंग हार गईं प्रिया </strong></h4>
<p>कुछ साल पहले प्रिय मराठे को कैंसर का पता चला था. शुरुआती इलाज के बाद वह इस बीमारी से उबर गईं और फिर से अपनी सामान्य जिंदगी में लौट आईं. उन्होंने विदेश में थिएटर टूर तक किया. लेकिन पिछले कुछ महीनों में बीमारी ने फिर से उन्हें घेर लिया. लगातार इलाज के बावजूद उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई. डॉक्टरों के प्रयास नाकाम रहे और रविवार सुबह 4 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनकी यह जंग लाखों लोगों के लिए प्रेरणा रही, जिन्होंने उन्हें हमेशा मजबूत और मुस्कुराती हुई शख्सियत के रूप में देखा.</p>
<h5><strong>मनोरंजन जगत में शोक की लहर</strong></h5>
<p>प्रिया मराठे के निधन से पूरा मराठी और हिंदी मनोरंजन जगत गमगीन है. उनकी अचानक विदाई से साथी कलाकार और फैन्स सदमे में हैं. सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला लगातार जारी है. सहकर्मी कलाकारों ने उन्हें मेहनती, खुशमिजाज और जिंदादिल इंसान के रूप में याद किया. उनकी मुस्कान और परफॉर्मेंस को लोग लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे.</p>
<h6><strong>आज होगा प्रिया का अंतिम संस्कार</strong></h6>
<p>परिवार ने जानकारी दी है कि प्रिया मराठे का अंतिम संस्कार रविवार शाम 4 बजे मीरारोड स्थित हिंदू श्मशानभूमि में किया जाएगा. सुबह से ही रिश्तेदार और करीबी उनके घर पर पहुंचकर अंतिम दर्शन कर रहे हैं. उनके निधन की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में भी शोक की लहर दौड़ गई. कला जगत ही नहीं, बल्कि आम दर्शकों के लिए भी उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है.</p>
<h6><strong>यादों में हमेशा जिंदा रहेंगी प्रिया</strong></h6>
<p>प्रिया मराठे ने अपने छोटे से करियर में ही गहरी छाप छोड़ी. चाहे मराठी टीवी हो या हिंदी धारावाहिक, हर जगह उनके अभिनय को सराहा गया. महज़ 38 साल की उम्र में उनके निधन ने सभी को हिला दिया है. लेकिन पर्दे पर उनके काम और उनकी जीवन से लड़ने की जिद हमेशा लोगों को याद दिलाती रहेगी कि वह कितनी मजबूत और जिंदादिल इंसान थीं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Aug 2025 11:17:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में पहली बार बधिर दर्शकों के लिए ‘जीसस’ का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 35 शहरों तक पहुंचेगा संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में पहली बार बधिर दर्शकों के लिए खासतौर पर बनी फीचर फिल्म ‘जीसस: ए डेफ मिशन्स फिल्म’ का भव्य प्रीमियर हुआ. यह फिल्म पूरी तरह बधिर फिल्मकारों और कलाकारों द्वारा तैयार की गई है. भारतीय सांकेतिक भाषा और हिंदी वॉयसओवर के साथ बनाई गई इस फिल्म को आने वाले समय में 35 शहरों में प्रदर्शित किया जाएगा.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/delhi-premiere-jesus-deaf-missions-film-indian-sign-language/article-8296"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-08/jesus_deaf_missions_film.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Jesus A Deaf Missions Film: </strong>भारत में बधिर समुदाय को अक्सर मनोरंजन और धार्मिक सामग्री तक पूरी तरह पहुंच नहीं मिल पाती. लेकिन अब इस अंतर को मिटाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. राजधानी दिल्ली में ‘जीसस: ए डेफ मिशन्स फिल्म’ का ऐतिहासिक प्रीमियर हुआ, जिसे बधिर दर्शकों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है. फिल्म को भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) और हिंदी वॉयसओवर के साथ पेश किया गया, ताकि हर कोई इसका पूरा आनंद ले सके.</p>
<h3><strong>प्रीमियर का ऐतिहासिक पल</strong></h3>
<p>24 अगस्त को दिल्ली में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में 250 से अधिक बधिर दर्शक और कई सरकारी अधिकारी शामिल हुए. यह अवसर बधिर समुदाय के लिए बेहद खास रहा, क्योंकि पहली बार उन्हें अपनी "हृदय भाषा" में यीशु मसीह की कहानी बड़े पर्दे पर देखने को मिली.</p>
<p>दर्शकों ने इसे सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव करार दिया. खास बात यह है कि फिल्म का प्रदर्शन सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जल्द ही भारत के 35 शहरों में दिखाया जाएगा.</p>
<h4><strong>निर्देशक और सीईओ का बयान</strong></h4>
<p>डेफ मिशन्स के निदेशक और सीईओ जोसेफ डी. जोसलिन ने फिल्म के प्रीमियर के मौके पर कहा, “यह फिल्म बधिर समुदाय को उनकी अपनी भाषा में यीशु मसीह की कहानी से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है.</p>
<p>हमारी कोशिश है कि हर व्यक्ति, चाहे वह सुन सके या न सुन सके, इस संदेश से जुड़ पाए.” उनके इस बयान से साफ है कि यह सिर्फ एक सिनेमाई प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की पहल भी है.</p>
<h5><strong>भारत से भावनात्मक जुड़ाव</strong></h5>
<p>फिल्म में यीशु की भूमिका निभाने वाले गिदोन फ़र्ल ने भारत के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा किया. उन्होंने कहा, “भारत मेरे दिल में हमेशा खास जगह रखता है. यहां के बधिर समुदाय को यह संदेश देना मेरे लिए गर्व और भावुक कर देने वाला अनुभव है.” उनके इस बयान के बाद प्रीमियर में मौजूद बधिर दर्शक भावुक हो उठे और कई लोगों ने तालियों की गूंज के साथ उनका स्वागत किया.</p>
<h6><strong>साझेदारी से साकार हुआ सपना</strong></h6>
<p>इस अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट को भारत में लाने का श्रेय डेफ मिशन्स और मुंबई स्थित इंडिया साइनिंग हैंड्स (ISH) की साझेदारी को जाता है. आईएसएच के संस्थापक आलोक केजरीवाल ने कहा, “हमारा मानना है कि हर फिल्म सबके लिए सुलभ होनी चाहिए. हमने पहले ‘लिटिल कृष्णा’ को बधिर दर्शकों तक पहुंचाया था और अब ‘जीसस’ को लाना हमारे लिए गौरव की बात है.” इस साझेदारी ने साबित कर दिया कि जब संगठन मिलकर काम करते हैं, तो बड़ी बाधाओं को भी आसानी से पार किया जा सकता है.</p>
<h6><strong>क्यों है यह पहल महत्वपूर्ण</strong></h6>
<p>भारत में लाखों बधिर लोग हैं, जिन्हें सामान्य फिल्मों और धार्मिक सामग्री तक पूरी तरह पहुंच नहीं मिल पाती. संवाद और ध्वनि पर आधारित कंटेंट उनके लिए बाधा बनता है. ‘जीसस: ए डेफ मिशन्स फिल्म’ इस कमी को पूरा करने की दिशा में एक अहम पहल है.</p>
<p>इसमें भारतीय सांकेतिक भाषा की व्याख्या, हिंदी वॉयसओवर और विशेष साउंडट्रैक जोड़ा गया है, ताकि हर दर्शक समान रूप से फिल्म का अनुभव कर सके. यह कदम न सिर्फ मनोरंजन बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पहुंच को भी लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Aug 2025 11:43:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Viral Raju Kalakar: दिल पे चलाई छुरियां गाने वाले राजू कलाकार की असली कहानी क्या है? पत्थरों की धुन ने कर दिया फेमस</title>
                                    <description><![CDATA[पत्थर बजाकर गाना गाने वाले राजू कलाकार (Raju Kalakar) का वीडियो सोशल मीडिया पर छा गया है. 'दिल पे चलाई छुरियां' गाने पर उनके इमोशनल अंदाज़ ने करोड़ों दिलों को छुआ है. बड़ौदा में हॉर्स राइडिंग चलाने वाले राजू के वीडियो को 16 मिलियन से ज़्यादा व्यूज़ मिल चुके हैं.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/raju-kalakar-viral-video-dil-pe-chalai-churiya/article-8081"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-06/who_is_raju_kalakar_viral_vedio.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Who Is Viral Raju Kalakar: </strong>वो दो टूटे पत्थर थे, एक टूटा दिल और उस पर बिखरी आवाज़ में दर्द की लहर. राजू कलाकार का वीडियो दिल पे चलाई छुरियां (Dil Pe Chalai Churiya Viral) सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है. राजस्थान से गुजरात तक का ये सफर सिर्फ किलोमीटर का नहीं, इमोशन्स का है. उनके अभिनय, आवाज़ और पत्थरों की ताल ने रातों-रात उन्हें इंटरनेट सेंसेशन बना दिया है.</p>
<h3><strong>पत्थरों से दर्द का संगीत रचने वाला फकीर </strong></h3>
<p>राजू भट्ट, जिन्हें आज हर कोई राजू कलाकार (Raju Kalakar) के नाम से जान रहा है, एक आम इंसान हैं. लेकिन उनका हुनर असाधारण है. राजस्थान के नागौर में जन्मे राजू पिछले कुछ सालों से गुजरात के बड़ौदा में हॉर्स राइडिंग का छोटा सा काम चला रहे थे.</p>
<p>ज़िंदगी संघर्षों से भरी थी, लेकिन उम्मीदें अभी मरी नहीं थीं. एक दिन पत्नी से झगड़ा हुआ. वो ससुराल सूरत गई और जब राजू लेने पहुंचे, तो उसने साथ चलने से इनकार कर दिया. उस टूटे दिल की टीस को उन्होंने कुछ इस अंदाज़ में जिया कि पूरा देश उनका दीवाना हो गया.</p>
<h4><strong>पत्थरों की ताल, टूटा दिल और ग़मज़दा चेहरा</strong></h4>
<p>6 जून 2025 का दिन राजू कलाकार की ज़िंदगी बदलने वाला दिन साबित हुआ. उसी दिन उन्होंने अपने 14 साल पुराने दोस्त राजन काली से मुलाकात की. दोस्त ने समझाया कि ग़म को दिल में रखने से अच्छा है, उसे कला में ढाल दो.</p>
<p>राजू ने दो टूटे हुए टाइल्स के पत्थर लिए, बैकग्राउंड में बजाया गया फिल्म ‘बेवफ़ा सनम’ का गाना और राजू ने अपने ही स्टाइल में उस गाने को जिया. ना कोई स्टूडियो, ना कोई कैमरा. बस एक फोन, एक दोस्त और एक टूटा हुआ इंसान. और फिर जन्म हुआ वायरल वीडियो का.</p>
<h5><strong>रेमो डिसूजा समेत कई सेलिब्रिटीज को भी भाया राजू का अंदाज़</strong></h5>
<p>राजू कलाकार का वीडियो जैसे ही इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया, वो कुछ ही घंटों में वायरल हो गया. इस गाने की खास बात सिर्फ राजू की आवाज़ नहीं, बल्कि उनका एक्सप्रेशन, उनकी आंखों में छलकता दर्द और पत्थरों से निकाली गई ताल थी.</p>
<p>रेमो डिसूजा समेत कई सेलेब्स ने इस ट्रेंड पर वीडियो बनाकर राजू को सपोर्ट किया. इंटरनेट पर ‘दिल पे चलाई छुरियां’ ट्रेंड बन गया. रील्स, मीम्स और डुएट्स की बाढ़ आ गई. आम लोग राजू के साथ वीडियो बनाकर अपनी भावनाएं साझा कर रहे हैं.</p>
<h6><strong>ट्रेन से सीखी कला, अब बन गई पहचान</strong></h6>
<p>मीडिया से बातचीत में राजू कलाकार ने बताया कि पत्थर बजाने की कला उन्होंने एक ट्रेन यात्रा में सीखी थी. एक लड़के को देखा जो टाइल्स के पत्थरों को ताल की तरह बजा रहा था. तभी से वो भी गानों को पत्थरों से ताल देने लगे.</p>
<p>पहले इसे शौक समझा, लेकिन अब यही हुनर उनकी पहचान बन चुका है. राजू का कहना है कि कभी नहीं सोचा था कि ये कला उन्हें इतनी दूर तक ले जाएगी. अब उन्हें उम्मीद है कि किसी फिल्म या शो में उन्हें मौका मिलेगा जहां वो अपने टैलेंट को साबित कर सकें.</p>
<h6><strong>20 दिन में बने इंस्टाग्राम स्टार, 1.47 लाख फॉलोअर्स</strong></h6>
<p>वायरल वीडियो के बाद राजू कलाकार के नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया गया. @RajuKalakar नाम से बने इस प्रोफाइल पर सबसे पहले वही वीडियो अपलोड हुआ जिसने उन्हें मशहूर किया.</p>
<p>20 दिन में ही राजू के 1.47 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं. अब वो लगातार अपने छोटे-छोटे वीडियो पोस्ट कर रहे हैं और लोगों से ढेर सारा प्यार बटोर रहे हैं. उनकी लोकप्रियता देखकर कई स्थानीय इवेंट्स और यूट्यूब चैनल्स ने भी उनसे संपर्क किया है.</p>
<h6><strong>'जिसके पास पैसा नहीं, वो राजू है': एक लाइन पूरी कहानी</strong></h6>
<p>राजू कलाकार अक्सर एक लाइन बोलते हैं—‘जिसके पास पैसा है वो राजा है, जिसके पास पैसा नहीं वो राजू है.’ ये लाइन सिर्फ व्यंग्य नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन का सार है. संघर्ष, दर्द, उम्मीद और आत्मविश्वास से भरी इस कहानी ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि टैलेंट को किसी स्टेज की जरूरत नहीं होती. बस एक फोन कैमरा और सच्चा एहसास काफी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jun 2025 09:27:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Anurag Kashyap Brahman: फुले’ फिल्म से फैला ज़हर ! अनुराग कश्यप बोले- ब्राह्मणों के चेहरे पर मूत दूं, देश में उबाल</title>
                                    <description><![CDATA[अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) के विवादित बयान पर ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया है. फिल्म ‘फुले’ को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ब्राह्मणों के चेहरे पर मूतने का मन करता है. इस टिप्पणी के बाद एफआईआर दर्ज हुई और देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/anurag-kashyap-fule-film-brahman-face-moot-zahar/article-7818"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-04/anurag_kashyap_brahaman_fule_film.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Anurag Kashyap Brahman: </strong>फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार उन्होंने ऐसा बयान दिया है जिसने सिनेमा से बाहर निकलकर सीधे जातीय अस्मिता और सम्मान को आघात पहुंचाया है. अपनी आगामी फिल्म ‘फुले’ को लेकर सेंसर बोर्ड से भिड़ने के दौरान उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा <strong>“अब मन करता है ब्राह्मणों के चेहरे पर पेशाब कर दूं”</strong> इस टिप्पणी के बाद पूरे देशभर में ब्राह्मण समुदाय में गुस्से की लहर दौड़ गई है. कई जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं और सोशल मीडिया पर उनका बहिष्कार और गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई है.</p>
<h3><strong>जाति पर विमर्श से सीधा अपमान: अनुराग का बयान या सामाजिक ज़हर?</strong></h3>
<p>अनुराग कश्यप ने जब सोशल मीडिया पर अपनी फिल्म ‘फुले’ को लेकर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों पर नाराजगी जाहिर की, तो उन्होंने एक लंबा पोस्ट लिखा जिसमें देश में जातिवाद की मौजूदगी पर सवाल उठाए. लेकिन यही पोस्ट उनके लिए जहर बन गया जब उन्होंने “ब्राह्मणों के चेहरे पर पेशाब करने” जैसी अश्लील और अपमानजनक टिप्पणी कर दी.</p>
<p>यह बात किसी डायलॉग या फिल्म के हिस्से में नहीं, बल्कि खुद उनके निजी अकाउंट से पोस्ट की गई. उन्होंने इसे एक निजी भावना बताया, लेकिन ब्राह्मण समाज ने इसे सीधे तौर पर अपने अस्तित्व और सम्मान पर हमला माना. सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि अगर यह बात किसी दूसरे धर्म या जाति को लेकर कही जाती, तो अब तक कानूनी शिकंजा कस चुका होता.</p>
<h4><strong>देशभर में ब्राह्मण समाज का उबाल, सड़कों से सोशल मीडिया तक विरोध</strong></h4>
<p>अनुराग कश्यप के बयान के बाद देश के कोने-कोने में ब्राह्मण संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है. बनारस, पटना, प्रयागराज, भोपाल, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें उनके पुतले जलाए गए और गिरफ्तारी की मांग की गई. वहीं सोशल मीडिया पर #ArrestAnuragKashyap, #BanPhuleMovie और #AntiBrahminAnurag जैसे ट्रेंड टॉप पर चल रहे हैं.</p>
<p>खास बात ये है कि विरोध अब केवल संगठनों तक सीमित नहीं रहा, सामान्य ब्राह्मण परिवारों और युवा वर्ग ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जताई है. वे इसे जातीय द्वेष और मानसिक हिंसा का रूप बता रहे हैं. लोगों का कहना है कि अनुराग कश्यप की अभिव्यक्ति की आजादी अब एकतरफा नफरत फैलाने का हथियार बन चुकी है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.</p>
<h5><strong>माफी या तंज? अनुराग की सफाई ने और भड़काया विवाद</strong></h5>
<p>बढ़ते बवाल के बीच अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर माफी की एक पोस्ट शेयर की, लेकिन वो भी माफी से ज्यादा चुनौती जैसी नजर आई. उन्होंने कहा, “मैं माफी मांगता हूं, लेकिन पूरी पोस्ट के लिए नहीं — सिर्फ उस एक लाइन के लिए जिसे गलत संदर्भ में लिया गया” इसके बाद उन्होंने लिखा कि “ब्राह्मण लोग, औरतों को बख्श दो, इतना तो शास्त्रों में भी है” उनके इस बयान को लोगों ने एक और परोक्ष हमला माना.</p>
<p>बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिवक्ता आशुतोष जे दुबे ने उनके खिलाफ FIR दर्ज करवा दी है, जिसमें कई संगीन धाराएं जोड़ी गई हैं. अब मामला सोशल मीडिया से निकलकर कानूनी दायरे में प्रवेश कर चुका है, और अनुराग की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>क्राइम</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Apr 2025 18:23:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Manoj Kumar Biography In Hindi: भारत कुमार के रूप में देशभक्ति की परिभाषा रचने वाले अभिनेता मनोज कुमार का निधन</title>
                                    <description><![CDATA[बॉलीवुड के ‘भारत कुमार’ मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे. 87 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. उनकी देशभक्ति से भरपूर फिल्मों ने करोड़ों दिलों को छुआ. उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनके विचार और योगदान हमेशा जीवित रहेंगे.]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/manoj-kumar-death-biography-in-hindi/article-7766"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-04/manoj_kumar_biography_in_hindi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Manoj Kumar Biography In Hindi: </strong>बॉलीवुड के स्वर्ण युग का एक सितारा अब हमारे बीच नहीं रहा. भारतीय सिनेमा को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर देने वाले अभिनेता, निर्देशक और लेखक मनोज कुमार का 87 साल की उम्र में निधन हो गया.</p>
<p>उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं, करोड़ों भारतीयों का दिल टूट गया है जिन्होंने उन्हें नायक नहीं, राष्ट्रप्रेम की मूर्ति के रूप में देखा था. </p>
<h3><strong>बचपन से संघर्षों का साथी था ये ‘भारत कुमार’</strong></h3>
<p>24 जुलाई 1937 को एबटाबाद (जो अब पाकिस्तान में है) में जन्मे मनोज कुमार का असली नाम <span style="color:rgb(186,55,42);"><strong>हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी</strong></span> था. जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तब उनका परिवार सब कुछ छोड़कर भारत आ गया. उन दिनों की असहायता और दर्द को उन्होंने जीवन भर अपने भीतर जिंदा रखा, और शायद यही वजह रही कि उनकी फिल्मों में देशभक्ति सिर्फ संवाद नहीं, आत्मा बनकर उतरती थी.</p>
<p>दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की राह पकड़ी. पर यह सफर आसान नहीं था. लेकिन दिलीप कुमार की फिल्म शबनम देखने के बाद उनके भीतर की आग भड़क उठी. उन्होंने अपना नाम ‘<strong>मनोज कुमार</strong>’ रख लिया—और इस तरह शुरू हुआ एक सुनहरा फिल्मी अध्याय.</p>
<h4><strong>एक अभिनेता, जो सिर्फ हीरो नहीं, विचार बन गया</strong></h4>
<p>मनोज कुमार ने कभी ग्लैमर की चकाचौंध को अपना मकसद नहीं बनाया. उन्होंने फिल्म को एक माध्यम माना — विचारों को जगाने का, लोगों को जोड़ने का, और देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देने का. पूरब और पश्चिम, उपकार, क्रांति, रोटी कपड़ा और मकान जैसी फिल्में उन्होंने सिर्फ अभिनय के लिए नहीं, समाज को आइना दिखाने के लिए कीं.</p>
<p>उपकार जैसी फिल्म में जब वह <strong>“मेरे देश की धरती”</strong> पर हल चलाते हुए दिखते हैं, तो वह एक कलाकार नहीं, हर भारतीय का प्रतिनिधि लगते हैं. इसी फिल्म से उन्हें<span style="color:rgb(52,73,94);"><strong> 'भारत कुमार' </strong></span>की उपाधि मिली, जो उनके नाम से बढ़कर पहचान बन गई.</p>
<h5><strong>निर्देशन में भी रच डाली मिसालें</strong></h5>
<p>मनोज कुमार न केवल एक कुशल अभिनेता थे, बल्कि एक संवेदनशील निर्देशक भी थे. उन्होंने जब जय हिंद का निर्देशन किया, तब भी देशभक्ति की भावना से कोई समझौता नहीं किया. उनके लिए फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं, समाज सेवा का एक माध्यम था.</p>
<h6><strong>सम्मान, जो कभी शब्दों में नहीं समा पाए</strong></h6>
<p>मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा में उनके अपार योगदान के लिए कई बड़े पुरस्कार मिले. उन्हें पद्मश्री, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, किशोर कुमार सम्मान, और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से नवाजा गया. लेकिन जनता के दिलों में जो स्थान उन्होंने बनाया, वह किसी ट्रॉफी या सम्मान से कहीं ऊपर था.</p>
<h6><strong>एक सादा लेकिन प्रभावशाली पारिवारिक जीवन</strong></h6>
<p>मनोज कुमार का पारिवारिक जीवन भी उतना ही सादा और प्रेरणादायक था. उन्होंने शशि गोस्वामी से विवाह किया और उनके दो बच्चे – कुणाल और साशा – हैं. उनके कजिन भाई मनीष गोस्वामी टीवी इंडस्ट्री के प्रसिद्ध प्रोड्यूसर हैं. भले ही उन्होंने ग्लैमर की दुनिया में नाम कमाया, लेकिन निजी जीवन में वे हमेशा जमीन से जुड़े इंसान रहे.</p>
<h6><strong>मनोज कुमार: एक युग, एक विचार, एक भावना</strong></h6>
<p>आज जब हम मनोज कुमार को याद करते हैं, तो सिर्फ एक अभिनेता की मौत नहीं हुई — बल्कि एक विचार का अंत हुआ, जो कहता था कि “सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, देश की सेवा भी हो सकता है” उनके जैसे कलाकार सदियों में एक बार जन्म लेते हैं. उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी फिल्में, उनके संवाद और उनके आदर्श हमेशा हमें प्रेरणा देते रहेंगे.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 11:18:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vishwa Deepak Awasthi]]></dc:creator>
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                <title>Sushant Singh Rajput: सुशांत सिंह राजपूत केस में क्या है CBI की क्लोजर रिपोर्ट ! रिया चक्रवर्ती का क्या हुआ, जानिए मौत या मिस्ट्री </title>
                                    <description><![CDATA[सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) केस में CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने एक बार फिर हलचल मचा दी है, रिपोर्ट में आत्महत्या की पुष्टि हुई और रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) को क्लीन चिट मिली है. जानिए पूरी रिपोर्ट, जांच के निष्कर्ष और अदालत में आगे की कार्रवाई से जुड़ी अहम जानकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.yugantarpravah.com/entertainment/sushant-singh-rajput-cbi-closure-report-rhea-chakraborty/article-7718"><img src="https://www.yugantarpravah.com/media/400/2025-03/sushant_singh_rajput_cbi_closure_report.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>Sushant Singh Rajput Closer Report:</strong> बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले में शनिवार को बड़ा अपडेट सामने आया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जिसमें किसी भी साजिश या हत्या की आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अभिनेता की मौत आत्महत्या का मामला था और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता नहीं मिली है. </p>
<h3><strong>रिया चक्रवर्ती और परिवार को मिली क्लीन चिट</strong></h3>
<p>इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी रहीं रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) और उनके परिवार को सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी है. सुशांत के परिवार ने उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने और आर्थिक गबन का आरोप लगाया था, लेकिन जांच एजेंसी ने इन आरोपों को अस्वीकार कर दिया. </p>
<p>मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारी दी, <span style="color:rgb(52,73,94);"><strong>"सीबीआई ने अपनी अंतिम रिपोर्ट विशेष अदालत में पेश कर दी है. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह आत्महत्या का मामला था और किसी भी तरह की साजिश या हत्या के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं"</strong></span></p>
<h4><strong>सुशांत सिंह राजपूत की मौत और शुरुआती जांच</strong></h4>
<p>14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) का शव मुंबई स्थित उनके फ्लैट में पंखे से लटका मिला था. शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला माना गया, लेकिन सोशल मीडिया पर उठी बहस और परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते महाराष्ट्र पुलिस, बिहार पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और CBI समेत कई एजेंसियों ने जांच की.</p>
<h5><strong>एम्स रिपोर्ट ने किया हत्या के दावे को खारिज</strong></h5>
<p>सीबीआई ने इस केस में AIIMS (एम्स) के फोरेंसिक विशेषज्ञों से भी राय ली थी, जिसमें जहर देने और गला घोंटने जैसी संभावनाओं को नकार दिया गया था. एम्स के डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की समीक्षा के बाद बताया था कि सुशांत की मौत दम घुटने से हुई थी और इसमें कोई बाहरी चोट या संघर्ष के संकेत नहीं मिले. </p>
<h6><strong>रिया चक्रवर्ती पर लगे आरोप और जांच</strong></h6>
<p>सुशांत के पिता के.के. सिंह ने पटना में दर्ज कराई गई FIR में आरोप लगाया था कि रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) और उनके परिवार ने सुशांत के पैसे का गबन किया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके कारण अभिनेता ने आत्महत्या कर ली. इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला.</p>
<p>एनसीबी ने भी इस मामले में ड्रग एंगल से जांच की थी और रिया समेत कई बॉलीवुड सेलेब्स से पूछताछ हुई थी. रिया को ड्रग्स मामले में लगभग एक महीने तक जेल में रहना पड़ा था. हालांकि, बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी. </p>
<h6><strong>सीबीआई रिपोर्ट पर अदालत का फैसला बाकी</strong></h6>
<p>सीबीआई ने अब विशेष अदालत में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इसे स्वीकार करती है या फिर आगे की जांच का आदेश देती है. फिलहाल, सीबीआई की रिपोर्ट के बाद यह मामला कानूनी रूप से लगभग समाप्ति की ओर है.</p>
<h6><strong>सुशांत सिंह राजपूत: एक चमकता सितारा</strong></h6>
<p>सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) ने टेलीविजन से अपने करियर की शुरुआत की और 'पवित्र रिश्ता' में शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई. उन्होंने ‘काई पो चे’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘छिछोरे’ और ‘केदारनाथ’ जैसी हिट फिल्मों में काम किया. खासकर महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक से उन्हें अपार लोकप्रियता मिली थी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मनोरंजन</category>
                                            <category>क्राइम</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Mar 2025 00:30:11 +0530</pubDate>
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