फ़तेहपुर:राजनाथ सिंह की रैली के बाद क्या साध्वी के लिए एकजुट हो पाएगा भाजपा का क्षत्रिय कुनबा.?

शनिवार को ज़िले के गाजीपुर क़स्बे में हुई केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की रैली के बाद क्या भाजपा के स्थानीय क़द्दावर क्षत्रिय नेता साध्वी के लिए एकजुट हो पाएंगे...पढ़े युगान्तर प्रवाह की यह एक्सक्लुसिव रिपोर्ट.?

फतेहपुर: पांचवें चरण के चुनावों के लिए सभी पार्टियों का प्रचार प्रसार अपनी चरम सीमा है। सभी पार्टियों के प्रत्याशी अपनी अपनी पार्टियों के सभी बड़े नेताओं को अपने चुनावी क्षेत्र में बुलाकर जनसभाओं के ज़रिए अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं।

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इसी क्रम में शनिवार को ज़िले में आए केंद्र की मौजूदा सरकार में गृहमंत्री व भाजपा के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह ने गाजीपुर क़स्बे में आयोजित जनसभा में शिरकत कर पार्टी प्रत्याशी साध्वी निरंजन ज्योति के लिए वोट की अपील की। वैसे तो राजनाथ सिंह ने इस रैली के माध्यम से भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दे राष्ट्रवाद पर ही फ़ोकस किया परंतु सिंह की इस रैली को जिले में भाजपा के भीतर ही उतपन्न मौजूदा सियासी हालातों से जोड़कर देखा जा रहा है।

आख़िर राजनाथ सिंह की क्यों पड़ी ज़रूरत..?

मोदी लहर में साल 2014 का चुनाव जीतकर लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में पहुंची ज़िले की मौजूदा सांसद साध्वी निरंजन ज्योति इस बार के चुनाव में भी फतेहपुर लोकसभा सीट से मैदान में हैं। परन्तु मौजूदा वक़्त के हालातों को देखते हुए साध्वी की राह 2014 के मुकाबले इस बार के चुनाव में चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।जहाँ एक ओर सपा बसपा का गठबंधन हो जाने से साध्वी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी ओर सूत्रों की माने तो भाजपा के अंदर ही कुछ स्थानीय विधायकों का पूरे मन से साध्वी को सपोर्ट न करना अपने आप मे साध्वी के लिए दोहरी मुसीबत पैदा किए हुए है।

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ग़ौरतलब है कि साध्वी के सांसद बनने के बाद से ही भाजपा के एक स्थानीय विधायक से सांसद की कई मुद्दों पर अलग राय रखने से दोनों का आपस में विरोध पूरे पाँच साल लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। लेक़िन पिछले कुछ समय से यह विरोध तब औऱ ज्यादा दिखने लगा जब वही विधायक मौजूदा लोकसभा चुनाव में टिकट की रेस में बहुत ऊपर तक निकल गए पर शीर्ष नेतृत्व ने साध्वी पर ही भरोसा जता उन्हें दोबारा चुनावी मैदान में उतार दिया।इसके साथ ही एक अन्य स्थानीय विधायक का अपने पुत्र के लिए लोकसभा का टिकट मांगना भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र रहा।


सूत्रों की माने तो दोनों स्थानीय विधायकों ने साध्वी को इस बार टिकट दिए जाने का ऊपर तक पुरजोर विरोध किया था परन्तु शीर्ष नेतृत्व ने साध्वी पर ही भरोसा जता उन्हें मैदान में उतार दिया।जिसके बाद से दोनों ने साध्वी के चुनाव से पर्याप्त दूरी बना ली थी।ऐसे बिगड़े हालातों के बीच पीएम मोदी का ज़िले में दौरा भी न होना साध्वी की मुश्किलें बढ़ाने वाला था।जिसके बाद से साध्वी किसी भी क़ीमत पर राजनाथ सिंह को ज़िले में लाकर बिगड़े हुए चुनावी समीकरण को दुरुस्त करने की कोशिश में थी आखिरकार वह सफ़ल हुई और गृहमंत्री ने गाजीपुर क़स्बे में पहुंच भाजपा के अंदर जान फूंकने की कोशिश की।


आपको बता दे कि राजनाथ सिंह भाजपा के अंदर बड़े नेता तो हैं ही साथ ही पूरे देश का एक बहुत बड़ा तबका वर्तमान में उनको क्षत्रियों का सबसे बड़ा नेता मानती है।शनिवार के दिन हुई ज़िले के गाजीपुर क़स्बे में राजनाथ सिंह की रैली भाजपा के अंदर बिखरे हुए क्षत्रिय कुनबे को साध्वी के लिए कितना एकजुट कर पाई है ये तो आगामी 23 मई को परिणाम आने के बाद ही पता चल पाएगा।

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